आपद्धर्मनिर्णयः — विश्वामित्र-श्वपचसंवादः
Apaddharma Determination: Dialogue of Viśvāmitra and the Śvapaca
तत् कृत्यमभिनिर्वर्त्य प्रकृति: शत्रुतां गता । “तुम जातिसे ही मेरे शत्रु हो, किंतु विशेष प्रयोजनसे मित्र बन गये थे। वह प्रयोजन सिद्ध कर लेनेके पश्चात् तुम्हारी प्रकृति फिर सहज शत्रुभावको प्राप्त हो गयी ।।
毗湿摩说道:“你按出身本为我敌,只因一桩特殊的目的才暂成朋友;待那目的既遂,你的本性便又回归于自然的敌意。”
भीष्म उवाच