त॑ कार्मुकधरं दृष्टवा श्रमार्त क्षुधितं तदा । समेत्य ऋषयस्तस्मिन् पूजां चक्कुर्यथाविधि,वे परिश्रमसे पीड़ित और भूखसे व्याकुल हो रहे थे। उस अवस्थामें धनुष धारण किये राजा सुमित्रको देखकर बहुत-से ऋषि उनके पास आये और सबने मिलकर उनका विधिपूर्वक स्वागत-सत्कार किया
当时,那位执弓之王因劳顿而困乏,又为饥饿所逼。众多仙人见到苏密特罗王在那般境况下仍挽弓在身,便前来相会,依照仪轨共同为他行礼致敬、设礼款待。
भीष्म उवाच