Vyāghra–Gomāyu Saṃvāda (व्याघ्रगोमायु संवाद) — Testing Character Beneath Appearances
दुःखेन श्लिष्यते भिन्न श्लिष्टं दुःखेन भिद्यते । भिन्ना श्लिष्टा तु या प्रीतिर्न सा स्नेहेन वर्तते,'प्रेमका बन्धन बड़ी कठिनाईसे टूटता है, पर जब वह एक बार टूट जाता है, तब बड़ी कठिनाईसे जुट पाता है। जो प्रेम बारंबार टूटता और जुड़ता रहता है, उसमें स्नेह नहीं होता
“情爱的纽带,断裂殊为艰难;然而一旦断了,再要缝合亦同样艰难。那种屡断屡合的情分,并不建立在真挚的柔情之上。”
भीष्म उवाच