अध्याय ९ — दुर्योधनस्य अन्त्यावस्था, विलापः, तथा सौप्तिक-प्रतिवृत्तम्
Duryodhana’s Final Condition, Lamentation, and the Night’s Report
कृप उवाच न दैवस्यातिभारो5स्ति यदयं रुधिरोक्षित: । एकादशचमूभर्ता शेते दुर्योधनो हतः,कृपाचार्य बोले--हाय! विधाताके लिये कुछ भी करना कठिन नहीं है। जो कभी ग्यारह अक्षौहिणी सेनाके स्वामी थे, वे ही ये राजा दुर्योधन यहाँ मारे जाकर खूनसे लथपथ हुए पड़े हैं
kṛpa uvāca na daivasyātibhāro 'sti yad ayaṃ rudhirokṣitaḥ | ekādaśa-camū-bhartā śete duryodhano hataḥ ||
克利波(Kṛpa)说道:“对命运而言,没有什么负担是过重的。看吧——曾统御十一支大军的难敌,如今被杀,血染其身,倒卧于此。”
कृप उवाच