Aśvatthāmā’s Buddhi-Doctrine and Nocturnal Incursion Resolve (अश्वत्थाम्नः बुद्धिविचारः सौप्तिकसंकल्पश्च)
“यदि क्षत्रियके धर्मको जानकर भी मैं ब्राह्मणत्वका सहारा लेकर कोई दूसरा महान् कर्म करने लगूँ तो सत्पुरुषोंके समाजमें मेरे उस कार्यका सम्मान नहीं होगा ।। धाययंश्व थर्नुर्दिव्यं दिव्यान्यस्त्राणि चाहवे । पितरं निहतं दृष्टवा कि नु वक्ष्यामि संसदि
“若我明知刹帝利之法,却又倚仗婆罗门之名去做另一桩所谓‘大业’,那么在贤者之众中,我的作为必不受敬重。我在战阵中执持天弓与天兵;眼见父亲被杀,我在议会之中又能说什么?”
संजय उवाच