Daiva–Puruṣakāra Saṃvāda
Kṛpa’s Counsel on Destiny and Human Effort
अकृत्वा कर्म यो लोके फलं विन्दति घिछित: । स तु वक्तव्यतां याति द्वेष्पो भवति भूयश:,परंतु जो इस जगत्में कोई काम न करके बैठा-बैठा फल भोगता है; वह प्राय: निन्दित होता है और दूसरोंके द्वेषका पात्र बन जाता है
akṛtvā karma yo loke phalaṁ vindati kiñcitaḥ | sa tu vaktavyatāṁ yāti dveṣyo bhavati bhūyaśaḥ ||
然而在此世间,凡不劳而获、坐享其成者,往往招致非议;屡屡被指为可责之人,并成为他人憎恨的对象。
कृप उवाच