यथाफला: षण्ढतिला यथा चर्ममया मृगा: । तथैव पाण्डवा: सर्वे यथा काकयवा अपि,'जैसे थोथे तिल बोनेपर फल नहीं देते हैं, जैसे केवल चर्ममय मृग व्यर्थ हैं तथा जैसे काकयव (तंदुलरहित तृणधान्य) निष्प्रयोजन होते हैं, उसी प्रकार समस्त पाण्डवोंका जीवन निरर्थक हो गया है
vaiśampāyana uvāca |
yathāphalāḥ ṣaṇḍhatilā yathā carmamayā mṛgāḥ |
tathaiva pāṇḍavāḥ sarve yathā kākayavā api ||
毗湿摩波耶那说道:“正如瘠薄之芝麻不结其果,正如皮革所制之‘鹿’不过空壳伪形,正如kākayava——徒有谷壳而无米仁——全然无用;同样,在此一刻,般度五子众人的生命也仿佛成了徒然。”
वैशम्पायन उवाच