धृतराष्ट उवाच तूर्ण प्रत्यानयस्वैतान् कामं॑ व्यध्वगतानपि । आगच्छन्तु पुनर्ययूतमिदं कुर्वन्तु पाण्डवा:,धृतराष्ट्रने कहा--बेटा! पाण्डवलोग दूर चले गये हों, तो भी तुम्हारी इच्छा हो, तो उन्हें तुरंत बुला लो। समस्त पाण्डव यहाँ आयें और इस नये दाँवपर फिर जूआ खेलें
持国王说道:“若你愿意,即便他们已走远,也要立刻把他们召回。让所有般度五子再来此处,就这新的赌注再掷骰一局。”
धृतराष्ट उवाच