पुनर्द्यूत-समाह्वानम्
Renewed Summons to the Dice-Game and Exile Wager
द्रौपहुुवाच इमे सभायामुपनीतशास्त्रा: क्रियावन्त: सर्व एवेन्द्रकल्पा: । गुरुस्थाना गुरवश्वैव सर्वे तेषामग्रे नोत्सहे स्थातुमेवम्,द्रौपदीने कहा--अरे दुष्ट! ये सभामें शास्त्रोंके विद्वान, कर्मठ और इन्द्रके समान तेजस्वी मेरे पिताके समान सभी गुरुजन बैठे हुए हैं। मैं उनके सामने इस रूपमें खड़ी होना नहीं चाहती
draupady uvāca: ime sabhāyām upanītaśāstrāḥ kriyāvantaḥ sarva evendrakalpāḥ | gurusthānā guravaś caiva sarve teṣām agre notsahe sthātum evam ||
德罗帕蒂说道:“在这王家议殿之中,坐着通晓经论(śāstra)之士,行事有为,人人光辉如因陀罗。他们皆是可居师位的长者,尽皆可敬。我在他们面前,实不忍以此形状站立。”
वैशम्पायन उवाच