पुनर्द्यूत-समाह्वानम्
Renewed Summons to the Dice-Game and Exile Wager
वैशम्पायन उवाच युधिष्ठिरस्तु तच्छुत्वा दुर्योधनचिकीर्षितम् । द्रौपद्या: सम्मतं दूतं प्राहिणोद् भरतर्षभ,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! दुर्योधन क्या करना चाहता है, यह सुनकर युधिष्ठिरने द्रौपदीके पास एक ऐसा दूत भेजा, जिसे वह पहचानती थी और उसीके द्वारा यह संदेश कहलाया, 'पांचालराजकुमारी! यद्यपि तुम रजस्वला और नीवीको नीचे रखकर एक ही वस्त्र धारण कर रही हो, तो भी उसी दशामें रोती हुई सभामें आकर अपने श्वशुरके सामने खड़ी हो जाओ
vaiśampāyana uvāca | yudhiṣṭhiras tu tac chrutvā duryodhana-cikīrṣitam | draupadyāḥ sammatam dūtaṃ prāhiṇod bharatarṣabha ||
毗湿摩波耶那说道:婆罗多族中的雄杰啊!坚战听闻难敌意欲所为,便遣一名为德罗帕蒂所认可、她一见便知的使者前往,好借其口传达讯息。
वैशम्पायन उवाच