नारदेन दिव्यसभाः कथितुं प्रतिज्ञा
Nārada’s Prelude to Describing the Divine Assemblies
नारद उवाच मानुषेषु न मे तात दृष्टपूर्वा न च श्रुता । सभा मणिमयी राजन् यथेयं तव भारत,नारदजीने कहा--तात! भरतवंशी नरेश! मणि एवं रत्नोंकी बनी हुई जैसी तुम्हारी यह सभा है, ऐसी सभा मैंने मनुष्यलोकमें न तो पहले कभी देखी है और न कानोंसे ही सुनी है
nārada uvāca mānuṣeṣu na me tāta dṛṣṭapūrvā na ca śrutā | sabhā maṇimayī rājan yatheyam tava bhārata ||
那罗陀说道:“孩子啊——婆罗多族的君王——在人间,我既未曾见过,也未曾听闻,有如你这般以宝珠珍玉造成的议事大殿。”
नारद उवाच