Śakuni–Duryodhana-saṃvāda: Dyūta-yojanā (Śakuni and Duryodhana on Planning the Dice-Game)
एष तिष्ठति गोविन्द: पूजितो<स्माभिरच्युत: । यस्य वस्त्वरते बुद्धिर्मरणाय स माधवम्,“हमने जिनकी पूजा की है, अपनी महिमासे कभी च्युत न होनेवाले वे भगवान् गोविन्द तुमलोगोंके सामने मौजूद हैं। तुमलोगोंमेंसे जिसकी बुद्धि मृत्युका आलिंगन करनेके लिये उतावली हो रही हो, वह इन्हीं यदुकुल-तिलक चक्रगदाधर श्रीकृष्णको आज युद्धके लिये ललकारे और इनके हाथों मारा जाकर इन्हीं भगवानके शरीरमें प्रविष्ट हो जाय”
eṣa tiṣṭhati govindaḥ pūjito 'smābhir acyutaḥ | yasya vastv-arate buddhir maraṇāya sa mādhavam ||
毗舍摩波耶那说:“看哪,戈文达——阿周陀——我们已按礼敬奉的那一位,就站在这里。你们之中若有人心思急切,渴求‘真实之物’——也就是死亡本身——就让他今日向摩陀婆挑战决战;若被祂之手所杀,便将进入那位主宰的身体之中。”
वैशम्पायन उवाच