Bhīṣma–Śiśupāla-saṃvādaḥ
Bhishma and Shishupala’s exchange in the assembly
(अर्कप्रमाणौ तौ वृक्षौ यद्यनेन निपातितौ । नागश्न पातितो$नेन तत्र को विस्मय: कृत: ।।) आकके पौधोंके बराबर दो अर्जुन वृक्षोंको यदि श्रीकृष्णने गिरा दिया अथवा एक नागको ही मार गिराया तो कौन बड़े आश्वर्यका काम कर डाला?। वल्मीकमात्र: सप्ताहं यद्यनेन धृतो5चल: । तदा गोवर्धनो भीष्म न तच्चित्रं मतं मम,भीष्म! यदि इसने गोवर्धनपर्वतको सात दिनतक अपने हाथपर उठाये रखा तो उसमें भी मुझे कोई आश्वर्यकी बात नहीं जान पड़ती; क्योंकि गोवर्धन तो दीमकोंकी खोदी हुई मिट्टीका ढेरमात्र है
arkapramāṇau tau vṛkṣau yady anena nipātitau | nāgaś ca pātito 'nena tatra ko vismayaḥ kṛtaḥ || valmīkamātraḥ saptāhaṃ yady anena dhṛto 'calaḥ | tadā govardhano bhīṣma na tac citraṃ mataṃ mama ||
尸首波罗说道:“若他砍倒那两棵不过如阿迦草木般大小的阿周那树,或只是击落一条蛇,又有何可惊?即便他托举一座山七日之久——毗湿摩啊——在我看来也不足为奇;因为戈瓦尔达那,在我眼中,不过如蚁丘般的一堆土罢了。”
शिशुपाल उवाच