Samrāt-Lakṣaṇa and the Counsel to Check Jarāsandha (सम्राट्-लक्षणं जरासन्ध-प्रतिबाधा-परामर्शः)
योजनान्ते शतद्वारं वीरविक्रमतोरणम् | अष्टादशावरै्नद्ध क्षत्रियैर्युद्धदुर्मदै:,रैवतकी दुर्गकी लम्बाई तीन योजनकी है। एक-एक योजनपर सेनाओंके तीन-तीन दलोंकी छावनी है। प्रत्येक योजनके अन्तमें सौ-सौ द्वार हैं, जो सेनाओंसे सुरक्षित हैं। वीरोंका पराक्रम ही उस गढ़का प्रधान फाटक है। युद्धमें उन््मत्त होकर पराक्रम दिखानेवाले अठारह यादववंशी क्षत्रियोंसे वह दुर्ग सुरक्षित है
yojanānte śatadvāraṁ vīravikramatoraṇam | aṣṭādaśāvarair naddhaṁ kṣatriyair yuddhadurmadāḥ ||
圣克里希纳(Śrī Kṛṣṇa)说道:“每一由旬之尽头皆立有百门之固垒,其门阙仿佛由英雄的勇武与威势铸成。此处由十八位雅陀婆(Yādava)刹帝利守护,他们沉醉于战斗的热烈。”
श्रीकृष्ण उवाच