मयस्य प्रतिकृतिः — Maya’s Offer and the Commissioning of the Sabhā
ततो विचिन्त्य मनसा लोकनाथ: प्रजापति: । चोदयामास त॑ कृष्ण: सभा वै क्रियतामिति,तदनन्तर मन-ही-मन कुछ सोचकर प्रजापालक लोकनाथ भगवान् श्रीकृष्णने उससे कहा--'शिल्पियोंमें श्रेष्ठ दैत्वराज मय! यदि तुम मेरा कोई प्रिय कार्य करना चाहते हो तो तुम धर्मराज युधिष्ठिके लिये जैसा ठीक समझो, वैसा एक सभाभवन बना दो
tato vicintya manasā lokanāthaḥ prajāpatiḥ | codayāmāsa taṃ kṛṣṇaḥ sabhā vai kriyatām iti ||
随后,世界之主、众生之父的圣黑天在心中思量已定,便吩咐道:“当建一座王者议事的大会堂。”
अजुन उवाच