सेनावशेषं तं दृष्टवा तव सैन्यस्य पाण्डव:,विश्रुतं त्रिषु लोकेषु व्याक्षिपद् गाण्डिवं धनु: । नरेश्वर! उस समय वहाँ खड़े हुए बलवान् पराक्रमी सव्यसाची पाण्डुपुत्र अर्जुन आपकी सेनाका कुछ भाग अवशिष्ट देखकर कुपित हो उठे और अपने त्रिलोकविख्यात गाण्डीवधनुषकी टंकार करते हुए आपकी रथसेनापर जा चढ़े
senāvaśeṣaṃ taṃ dṛṣṭvā tava sainyasya pāṇḍavaḥ, viśrutaṃ triṣu lokeṣu vyākṣipad gāṇḍivaṃ dhanuḥ |
三阇耶说道:见你军只余残部,般度之子阿周那——名闻三界——怒意陡起,执起甘狄婆弓,使其弓弦发出闻名遐迩的震响,随即猛然冲向你的战车军阵。
संजय उवाच