'सूत! तुम धीरे-धीरे रथ आगे बढ़ाओ। मैं सम्पूर्ण सेनाओंके पीछे जब हाथमें धनुष लेकर खड़ा होऊँगा, उस समय अर्जुन मुझे लाँधकर आगे नहीं बढ़ सकते ।। युध्यमानं हि कौन्तेयं हनिष्यामि न संशय: । नोत्सहेन्मामतिक्रान्तुं वेलामिव महोदधि:,“यदि वे मुझसे युद्ध करेंगे तो मैं उन्हें निःसंदेह मार गिराऊँगा। जैसे महासागर अपनी तटभूमिको लाँधघकर आगे नहीं बढ़ता, उसी प्रकार वे भी मुझे लाँध नहीं सकते
yudhyamānaṃ hi kaunteyaṃ haniṣyāmi na saṃśayaḥ | notsaheṇ mām atikrāntuṃ velām iva mahodadhiḥ ||
“苏多啊!你慢慢驱车前行。待我手执弓矢,立于诸军之后之时,阿周那便不能越过我而再向前。若昆蒂之子与我交战,我必定将其击杀,毫无疑问。正如大海不能逾越自身的海岸,他也不能逾越我。”
संजय उवाच