किरीटथधारी अर्जुनके उत्तम बाणोंसे आहत होकर नित्य मद बहानेवाले, कवचधारी एवं मंगलमय लक्षणोंसे युक्त चार सौ रोषभरे हाथी धराशायी हो गये। उन हाथियोंपर सुवर्णमय कवच और सोनेके आभूषण धारण करनेवाले योद्धा बैठे थे और क्रूर स्वभाववाले महावत उन्हें अपने पैरोंकी एड़ियों तथा अँगूठोंसे आगे बढ़नेकी प्रेरणा दे रहे थे। उन सबके साथ गिरे हुए वे हाथी जीव-जन्तुओंसहित धराशायी हुए महान् पर्वतके शिखरोंके समान सब ओर पड़े थे। अर्जुनके बाणोंसे विशेष घायल होकर गिरे हुए उन गजराजोंके शरीरोंसे रणभूमि ढक गयी थी ।। समन्ताज्जलदप्रख्यान् वारणान् मदवर्षिण: । अभिपेदे<र्जुनरथो घनान् भिन्दन्निवांशुमान्,जैसे अंशुमाली सूर्य बादलोंको छिन्न-भिन्न करते हुए प्रकाशित हो उठते हैं, उसी प्रकार अर्जुनका रथ सब ओरसे मेघोंकी घटाके समान काले मदस्रावी गजराजोंको विदीर्ण करता हुआ वहाँ आ पहुँचा था
samantāj jaladaprakhyān vāraṇān madavarṣiṇaḥ | abhipede 'rjunaratho ghanān bhindann ivāṃśumān ||
三阇耶说道:阿周那——头戴宝冠者——以最上之箭射击,四百头披甲、具吉祥相、常流发情之汁而暴怒的战象尽皆中创仆地。象背之上坐着披金甲、佩金饰的武士;性情凶狠的象夫以脚跟与脚趾催逼它们向前。它们与人畜一同倒下,四散横陈,宛如巨山之巅崩塌倾覆。那些被阿周那之箭重创而倒的象王之躯,几乎遮蔽了整个战场。其时阿周那的战车闯入象群之中:群象黑如雨云,发情之汁如雨淋漓;战车四面冲决,撕裂其阵,正如光辉的太阳破开浓云而大放光明。
संजय उवाच