इस प्रकार श्रीमह्याभारत कर्णपर्वमें अर्जुनवाक्यविषयक चौहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ७४ ॥। अपने-आप बछ। अर: अं पञ्चसप्ततितमो< ध्याय: दोनों पक्षोंकी सेनाओंमें दन्द्रयुद्ध तथा सुषेणका वध ध्ृतराष्ट्र उवाच समागमे पाण्डवसृज्जयानां महाभये मामकानामगाधे । धनंजये तात रणाय याते कर्णेन तद् युद्धमथो<त्र कीदूक्ू,धृतराष्ट्रने पूछा--तात संजय! मेरे पुत्रों तथा पाण्डवों और सूंजयोंमें पहलेसे ही अगाध एवं महाभयंकर संग्राम छिड़ा हुआ था। फिर जब धनंजय भी वहाँ कर्णके साथ युद्धके लिये जा पहुँचे, तब उस युद्धका स्वरूप कैसा हो गया?
Dhṛtarāṣṭra uvāca: samāgame pāṇḍava-sṛñjayānāṃ mahābhaye māmakānām agādhe | dhanañjaye tāta raṇāya yāte karṇena tad yuddham atho ’tra kīdṛk ||
持国王说道:“亲爱的三阇耶啊!般度族与斯林阇耶族早已同我诸子交战,那战事浩大无边、可怖难量;而当檀那阇耶(阿周那)亲自赶到那里,为与迦尔那决战而来时,那场冲突又变作何等模样?请为我叙述那一战的情状。”
ध्ृतराष्ट्र उवाच