अर्जुन श्रीकृष्णके कहनेसे युधिष्ठिरके प्रति जो तिरस्कारपूर्ण वचन बोले थे, इसके कारण वे मन-ही-मन ऐसे उदास हो गये थे मानो कोई पाप कर बैठे हों ।। ततोअब्रवीद् वासुदेव: प्रहसन्निव पाण्डवम् । कथं नाम भवेदेतद् यदि त्वं पार्थ धर्मजम्,उनकी यह अवस्था देख भगवान् श्रीकृष्ण हँसते हुए-से उन पाण्डुकुमारसे बोले --'पार्थ! तुम तो राजाके प्रति केवल “तू” कह देनेमात्रसे ही इस प्रकार शोकमें डूब गये हो। फिर यदि धर्ममें स्थित रहनेवाले धर्मकुमार युधिष्ठिरको तीखी धारवाले तलवारसे मार डालते, तब तुम्हारी दशा कैसी हो जाती?
tato 'bravīd vāsudevaḥ prahasann iva pāṇḍavam | kathaṃ nāma bhaved etad yadi tvaṃ pārtha dharmajam ||
于是婆苏提婆(奎师那)仿佛含笑,对般度之子(阿周那)说道:“帕尔塔,这怎会如此?你不过因对国王(坚战)以过于亲昵的‘你’相称,便沉入哀愁;若你真以利刃之剑杀了持守法(dharma)的法王——坚战,你又将如何自处?”
संजय उवाच