कर्णपर्व — अध्याय ५७
Arjuna’s targeted advance; Śalya–Karṇa dialogue; interception attempts
जीवन्त इव दृश्यन्ते गततत्त्वास्तरस्विन: । “इस महासमरमें फेंके गये इन चक्रों और तोमरोंको भी देखो। विजयकी अभिलाषा रखनेवाले वेगशाली योद्धा नाना प्रकारके शस्त्रोंको हाथमें लिये हुए ही अपने प्राण खो बैठे हैं; तथापि जीवित-से दिखायी देते हैं || १७ & ।। गदाविमशथितैगत्रिर्मुसलैर्भिन्नमस्तकान्
jīvanta iva dṛśyante gatatattvāstarasvinaḥ |
三阇耶说道:“虽已气绝,那些迅捷的战士却仿佛仍然活着。在这场大战里,他们纵被击倒于飞掷的兵刃之间,仍似站立不倒,手中还握着武器。”
संजय उवाच