Saṃśaptaka-Varūthinī Saṅgrāma — Binding and Counter-Binding (संशप्तक-वरूथिनी-संग्रामः)
अन्यदस्मै वरं दद्यां वैश्यग्रामां क्षतुर्दश । सुस्फीतान् धनसंयुक्तान् प्रत्यासन्नचननोदकान् | अकुतोभयान् सुसम्पन्नान् राजभोज्यांक्षतुर्दश,“यदि अर्जुनको दिखानेवाला पुरुष उसे भी पूरा न समझे तो मैं उसे दूसरा श्रेष्ठ धन प्रदान करूँगा। जिनमें वैश्य निवास करते हों ऐसे चौदह समृद्धिशाली और धनसम्पन्न ग्राम दूँगा जिनके आसपास जंगल और जलकी सुविधा होगी और जहाँ किसी प्रकारका भय नहीं होगा। वे चौदहों गाँव अधिक सम्पन्न तथा राजोचित भोगोंसे परिपूर्ण होंगे
anyad asmai varaṁ dadyāṁ vaiśya-grāmāṁś caturdaśa | susphītān dhana-saṁyuktān pratyāsanna-cana-nodakān | akuto-bhayān susampannān rāja-bhojyāṁś caturdaśa ||
三阇耶说道:“我还要赐他另一份上等赏赐——十四座吠舍之村:兴盛繁荣,财货充盈,牧地与水源近在咫尺,四方无惧,富足圆满,并备有王者之享。”
संजय उवाच