Saṃśaptaka-Varūthinī Saṅgrāma — Binding and Counter-Binding (संशप्तक-वरूथिनी-संग्रामः)
दद्यां तस्मै सवत्सानां यो मे ब्रूयाद् धनंजयम् । 'जो मुझे अर्जुनका पता बता देगा, उसे मैं चार सौ सवत्सा दुधारू गौएँ दूँगा, जिनके सींगोंमें सोने मढ़े होंगे ।। १० है ।। न चेत् तदभिमन्येत पुरुषो<र्जुनदर्शिवान्,“यदि अर्जुनको दिखानेवाला पुरुष उस धनको पूर्ण नहीं समझेगा तो उसे और भी उत्तम धन, श्वैत रंगके पाँच सौ घोड़े दूँगा, जो सोनेके साज-बाजसे सुसज्जित तथा विशुद्ध मणियोंके आभूषणोंसे विभूषित होंगे
sañjaya uvāca | dadyāṁ tasmai savatsānāṁ yo me brūyād dhanañjayam | na cet tad abhimanyeta puruṣo 'rjunadarśivān |
三阇耶说道:“凡能告知我檀那阇耶(阿周那)所在之处者,我将赐予他四百头乳牛,头头带犊。若那亲眼见过阿周那之人仍嫌此赏不足,我还将赐他更胜的财宝——五百匹白马,金饰鞍具华丽铺陈,并以无瑕净宝为饰。”
संजय उवाच