काकोपमोपदेशः
The Crow-and-Swan Exemplum as Counsel to Karṇa
त॑ नामृष्यत संक्रुद्धों हवमानं युधिष्ठिर: । अपविध्य धनुश्कछिन्न॑ क्रोधसंरक्तलोचन:,राजा युधिष्ठिर उस अपमानको सहन न कर सके। उनका क्रोध बहुत बढ़ गया। उनकी आँखें रोषसे लाल हो गयीं। उन्होंने उस कटे हुए धनुषको फेंककर दूसरा हाथमें ले लिया। फिर उन धर्मपुत्रने सेनाके मुहानेपर दुर्योधनके ध्वज और धनुषको भी काट डाला
taṁ nāmṛṣyata saṅkruddho havamānaṁ yudhiṣṭhiraḥ | apavidhya dhanuś chinnaṁ krodha-saṁrakta-locanaḥ ||
三阇耶说道:愤怒翻涌的坚战(郁提希提罗)再也忍受不了那般羞辱。怒火使他双目赤红;他掷开断弓,另取一张新弓,随即立于军阵最前,斩落杜尤陀那的旗幡,并截断其弓。
संजय उवाच