Karṇa-parva Adhyāya 19 — Saṃśaptaka–Trigarta Assault and Aindra-astra Counter
ततः: शरसहस्राणि प्रेषयामास वै द्विज: । इषुसम्बाधमाकाशमकरोद् दिश एव च,तब शत्रुसूदन द्रोणपुत्र विप्रवर अश्वत्थामाने अपने दिव्य धनुषपर प्रत्यंचा चढ़ाकर तथा यह भी देखकर कि मेरे रथमें सेवकोंने शीघ्र ही दूसरे उत्तम घोड़े लाकर जोत दिये हैं, सहस्रों बाण छोड़े तथा आकाश और दिशाओंको अपने बाणोंसे खचाखच भर दिया
tataḥ śarasahasrāṇi preṣayāmāsa vai dvijaḥ | iṣusambādham ākāśam akarod diśa eva ca ||
三阇耶说道:随后,那位婆罗门战士放出成千上万支箭矢。他以箭雨塞满长空,密不透风,仿佛连四方诸向也被填塞阻断——这般压倒性的武威展示,使战场黯然如夜,将厮杀推向无情的惨烈。
संजय उवाच