Pāṇḍya-vadha-anantaram Arjunasya Pravṛttiḥ
Arjuna’s Response and the Renewed Battle
नाप्याददत् संदधन्नैव मुछचन् बाणान् रथेडदृश्यत सव्यसाची । रथांश्व नागांस्तुरगान् पदातीन् संस्यूतदेहान् ददृशुर्हतांश्ष,रथपर बैठे हुए सव्यसाची अर्जुन कब तरकससे बाण लेते, कब उन्हें धनुषपर रखते और कब छोड़ते हैं, यह नहीं दिखायी देता था। सब लोग यही देखते थे कि रथियों, हाथियों, घोड़ों और पैदल सैनिकोंके शरीर उनके बाणोंसे गुँथे हुए हैं और वे प्राणशून्य हो गये हैं इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि अश्वत्थामपराजये सप्तदशो5ध्याय:
nāpy ādadat saṃdadhann eva muñcan bāṇān rathe 'dṛśyata savyasācī | rathāṃś ca nāgāṃs turagān padātīn saṃsyūtadehān dadṛśur hatāṃś ca ||
三阇耶说道:即便端坐战车之上,阿周那——左右手皆能运弓的神射——也无人看清他何时自箭囊取箭、何时搭弦上弓、何时放矢而出。众人只见其果:车战之士、战象、战马与步兵,身躯仿佛被他的箭矢“缝穿”一般,纷纷倒地,气绝无生。
संजय उवाच