Mahabharata Adhyaya 191
Drona ParvaAdhyaya 19180 Versesपांडव पक्ष का दबाव बढ़ता हुआ; द्रोण पर घेरा कसता है, पर दुर्योधन का प्रतिरोध तीव्र है।

Adhyaya 191

Chapter Arc: धृष्टद्युम्न द्रोणाचार्य के साथ उलझे हुए हैं, पर दुःशासन के तीखे बाण उनके रथ को छेदते हुए आते हैं—और क्रोध की ज्वाला अचानक दिशा बदल देती है। → दुःशासन के प्रहारों से पीड़ित धृष्टद्युम्न प्रतिशोध में दुर्योधन के घोड़ों पर बाण-वर्षा करते हैं; दुःशासन शरजाल से दबकर सामने टिक नहीं पाता। इसी बीच रणभूमि के दूसरे छोर पर सात्यकि और दुर्योधन के बीच क्षत्रिय-धर्म, युद्ध-नीति और क्रोध-लोभ की तीखी वाक्-प्रतिवाक् के साथ शस्त्र-प्रतिशस्त्र का संग्राम उठ खड़ा होता है। → हाथी और सिंह के समान क्रुद्ध होकर मधुवंशी सात्यकि और कुरुवंशी दुर्योधन का घोर द्वंद्व छिड़ता है; दुर्योधन हँसते हुए कान तक धनुष खींचकर तीस तीखे बाणों से सात्यकि को बेधता है, और युद्ध का ताप चरम पर पहुँचता है। → भीमसेन कर्ण के साथ घोर युद्ध में प्रवृत्त होते हैं; उधर पांचालों की तीखी बाण-वर्षा और भीमसेन आदि के घेराव से द्रोणाचार्य पर दबाव बढ़ता है—कौरव पक्ष की रक्षा-रेखा कई मोर्चों पर एक साथ खिंच जाती है। → द्रोण पर बढ़ता घेरा और दुर्योधन–सात्यकि का उग्र द्वंद्व अगले क्षण किस ओर पलटेगा—क्या द्रोण निकलेंगे, या पांडवों का दबाव निर्णायक बनेगा?

Shlokas

Verse 1

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ५६ श्लोक हैं।) ऑपन-आ प्रात बछ। अर: 2 एकोननवर्त्याधेकशततमो< ध्याय: धृष्टद्युम्नका दुःशासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण

三阇耶说道:“大王啊,当那场战斗正酣——象、马与人皆遭屠戮——杜赫沙萨那便与德里什塔丢摩那交战。”

Verse 2

स तु रुक्मरथासक्तो दुःशासनशरार्दित: । अमर्षात्‌ तव पुत्रस्य शरैर्वाहानवाकिरत्‌

三阇耶说道:然而他在与金车上的勇士缠斗之际备受压迫,又为杜赫沙萨那之箭所伤,终于难以忍受。盛怒之下,他以箭如雨,尽射汝子之马——此举将暴烈从对手转向其机动之本,显出战场之怒常以瘫痪支撑敌人的凭藉来求取优势,而非正面相搏。

Verse 3

धृष्टद्युम्न पहले द्रोणाचार्यके साथ उलझे हुए थे, दुःशासनके बाणोंसे पीड़ित होकर उन्होंने आपके पुत्रके घोड़ोंपर रोषपूर्वक बाणोंकी वर्षा आरम्भ कर दी ।।

三阇耶说道:“大王啊,只在一瞬之间,因普利沙塔之子持利什提优摩那所放出的密如骤雨的箭矢尽覆其上,杜沙娑那的战车——连同旗帜与御者——都已不可见了。”

Verse 4

दुःशासनस्तु राजेन्द्र पाउ्चाल्यस्य महात्मन: । नाशकत्‌ प्रमुखे स्थातुं शरजालप्रपीडित:,राजेन्द्र! महामना धृष्टद्युम्नके बाणसमूहोंसे अत्यन्त पीड़ित हो दुःशासन उनके सामने ठहर न सका

三阇耶说道:“大王啊,杜沙娑那被那位大心的般遮罗王子所射出的密集箭网逼迫得痛苦不堪,竟不能在他面前立足。”

Verse 5

स तु दुःशासनं बाणैर्विमुखीकृत्य पार्षत: । किरन्‌ शरसहस्राणि द्रोणमेवाभ्ययाद्‌ रणे

三阇耶说道:“以箭矢逼退杜沙娑那之后,普利沙塔之子持利什提优摩那在战场上再度挺进,直取德罗纳,并如雨般倾泻千支箭矢。”

Verse 6

अभ्यपद्यत हार्दिक्य: कृतवर्मा त्वनन्तरम्‌ । सोदर्याणां त्रयश्चनैव त एनं पर्यवारयन्‌ ६ ।। यह देख हृदिकपुत्र कृतवर्मा तथा दुःशासनके तीन भाई बीचमें आ धमके। वे चारों मिलकर धृष्टद्युम्नको रोकने लगे

三阇耶说道:“随后,哈尔迪迦·克利多跋摩冲上前来,紧接着又有三位同母同父的兄弟赶到。四人合围其身,意欲遏止他的推进。”

Verse 7

त॑ यमौ पृष्ठतो<न्चैतां रक्षन्तौ पुरुषर्षभौ । द्रोणायाभिमुखं यान्तं दीप्यमानमिवानलम्‌

三阇耶说道:“那对双生子——那俱罗与娑诃提婆,诸人中之雄——见持利什提优摩那如烈火般炽盛,正面奔向德罗纳,便在其后随行护卫。”

Verse 8

सम्प्रहारमकुर्वस्ते सर्वे च सुमहारथा: । अमर्षिता: सत्त्ववन्त: कृत्वा मरणमग्रत:,उस समय अमर्षसे भरे हुए उन सभी धैर्यशाली महारथियोंने मृत्युको सामने रखकर परस्पर युद्ध आरम्भ कर दिया

桑阇耶说道:当时,那些强大的战车武士全都怒火炽盛、勇气坚定,彼此发动冲杀,把死亡置于眼前,视作其决意所必付的代价。

Verse 9

शुद्धात्मान: शुद्धवृत्ता राजन्‌ स्वर्गपुरस्कृता: । आर्य युद्धमकुर्वन्त परस्परजिगीषव:

桑阇耶说道:“大王啊,他们心地清净,行止无瑕;以天界为至上目标,那些高贵之士——各自渴望战胜对方——依照阿利耶人应守的战法与规矩交战,而非出于残酷。”

Verse 10

शुक्लाभिजनकर्माणो मतिमन्तो जनाधिप । धर्मयुद्धमयुध्यन्त प्रेप्सन्तो गतिमुत्तमाम्‌

桑阇耶说道:大王啊,那些武士出身清净,行事无垢;因此他们明辨是非,投身于这场“法战”(dharma-yuddha),渴望获得至高的归宿。

Verse 11

न तत्रासीदधर्मिष्ठमशस्तं युद्धमेव च । नात्र कर्णी न नालीको न लिप्तो न च बस्तिक:

桑阇耶说道:“在那里,战斗并非不义之战,也非可耻之战。在那场交锋中,既不用karṇī,也不用nālīka;不用涂毒之箭,也不用名为bastika的兵器。”

Verse 12

न सूची कपिशो नैव न गवास्थिर्गजास्थिज: । इषुरासीन्न संश्लिष्टो न पूतिन्न च जिह्यग:

桑阇耶说道:在那场战斗中,不用针尖之箭;不用以猴骨制成之箭,也不用牛骨或象骨所造之箭;亦不用拼接复合之箭、带恶臭之箭,或飞行轨迹歪曲诡诈之箭。

Verse 13

ऋजून्येव विशुद्धानि सर्वे शस्त्राण्यधारयन्‌ । सुयुद्धेन परॉललोकानीप्सन्त: कीर्तिमेव च

三阇耶说道:那些武士都只持守正直而清净的兵器,希求——凭借合乎法度、堂堂正正的鏖战——在来世得升更高之界,并赢取长存的名声。

Verse 14

तदा<5<सीत्‌ तुमुल॑ युद्ध सर्वदोषविवर्जितम्‌ । चतुर्णा तव योधानां तैस्त्रिभि: पाण्डवै: सह,आपके चार योद्धाओंका तीन पाण्डववीरोंके साथ जो घमासान युद्ध चल रहा था, वह सब प्रकारके दोषोंसे रहित था

三阇耶说道:其时,一场喧腾激烈的战斗骤然兴起——毫无任何不公之瑕——在你方四名战士与那三位般度婆英雄之间展开,彼此贴身缠斗。

Verse 15

धृष्टद्युम्नस्तु तान्‌ दृष्टवा तव राजन्‌ रथर्षभान्‌ | यमाभ्यां वारितान्‌ वीरान्‌ शीघ्रास्त्रो द्रोणमभ्ययात्‌

三阇耶说道:大王啊,见你方那些车战中的雄杰如公牛般被双生兄弟(那俱罗与娑诃提婆)所遏止,善于疾发兵刃的提利湿陀昙那便径直冲向德罗纳。

Verse 16

निवारितास्तु ते वीरास्तयो: पुरुषसिंहयो: । समसज्जन्त चत्वारो वाता: पर्वतयोरिव,वहाँ रोके गये वे चारों वीर उन दोनों पुरुषसिंह पाण्डवोंके साथ इस प्रकार भिड़ गये मानो चौआई हवा दो पर्वतोंसे टकरा रही हो

三阇耶说道:虽被阻遏,那四位英雄仍逼近与那两位狮子般的男子缠斗。他们与般度婆的碰撞,恰如四道狂风冲击两座大山。

Verse 17

द्वाभ्यां द्वाभ्यां यमौ सार्थ रथाभ्यां रथपुड़्वौ । समासक्तौ ततो द्रोणं धृष्टद्युम्नो 5 भ्यवर्तत

三阇耶说道:双生兄弟那俱罗与娑诃提婆——车战之中最为卓绝者——各自以二对二之势与俱卢车战士交锋。与此同时,提利湿陀昙那继续推进,终于与德罗纳阿阇黎当面相对。

Verse 18

दृष्टवा द्रोणाय पाज्चाल्यं व्रजन्तं युद्धदुर्मदम्‌ । यमाभ्यां तांश्व संसक्तांस्तदन्तरमुपाद्रवत्‌

三阇耶说:见那般遮罗的勇士朝着德罗那猛冲而去,沉醉于战斗的狂热;又见诸将于双生阎摩之间近身缠斗、胶着不解,他便迅疾冲入其间的空隙。此景昭示:纵在战争的道义重压之下,战机亦须瞬息攫取;而武人则被怒火与武勇之傲所驱使。

Verse 19

त॑ सात्यकि: शीघ्रतरं पुनरेवाभ्यवर्तत

三阇耶说:萨提亚基又一次疾速回转,再度来到都利约陀那面前。见他来势如此迅捷,两人——在人间如狮般勇猛——便逼近相交。俱卢族的都利约陀那与摩陀婆族的萨提亚基近身相逢,无所畏惧,甚至含笑而战;在战火炽烈之际,他们把险境视作武艺与胆魄的试炼,而非退缩的缘由。

Verse 20

तौ परस्परमासाद्य समीपे कुरुमाधवौ । हसमानीौ नृशार्दूलावभीतौ समसज्जताम्‌

三阇耶说:当俱卢与摩陀婆——都利约陀那与萨提亚基——在近处正面相逢时,两人皆为人中狮子,无惧而含笑,遂相与交战。此景凸显武士之道:与势均力敌者当直面相接,以勇气与决心示人,纵然置身于骨肉相残之战的道义幽暗之中。

Verse 21

बाल्यवृत्तानि सर्वाणि प्रीयमाणौ विचिन्त्य तौ । अन्योनयं प्रेक्षमाणी च स्मयमानौ पुन: पुन:,बचपनकी सारी बातें याद करके वे दोनों वीर एक-दूसरेकी ओर देखते हुए बारंबार प्रसन्नतापूर्वक मुसकरा उठते थे

三阇耶说:两位英雄欣然追忆童年往事,彼此相望,屡屡含笑——在战争的严酷之中,旧日情谊与共同记忆竟也片刻浮现。

Verse 22

अथ दुर्योधनो राजा सात्यकि समभाषत | प्रियं सखायं सतत गर्हयन्‌ वृत्तमात्मन:,तदनन्तर राजा दुर्योधनने अपने बर्तावकी निरन्तर निन्दा करते हुए वहाँ अपने प्रिय सखा सात्यकिसे इस प्रकार कहा--

随后,都利约陀那王对萨提亚基开口说道。他一面不断责难自身的行径,一面以此言对挚友倾诉——在战争与王权的重压之下,显露出片刻自责之情。

Verse 23

धिक्‌ क्रोधं धिक्‌ सखे लोभं घिड्मोहं धिगमर्षितम्‌ । धिगस्तु क्षात्रमाचारं धिगस्तु बलमौरसम्‌

三阇耶说道:“唾弃愤怒吧,朋友;唾弃贪欲;唾弃迷妄;唾弃那不肯容忍的暴怒。唾弃武士的法度,也唾弃与生俱来、世袭的力量。”

Verse 24

यत्र मामभिसंधत्से त्वां चाहं शिनिपुड्भव । त्वं हि प्राणै: प्रियतरो ममाहं च सदा तव

三阇耶说道:“噢,尸尼的后裔啊,你为何瞄准我,我又为何瞄准你?被愤怒、贪欲等所驱使,我们竟将箭矢对准彼此。然而你曾比我的生命更为珍贵,我也一直是你所钟爱的。”

Verse 25

स्मरामि तानि सर्वाणि बाल्यवृत्तानि यानि नौ । तानि सर्वाणि जीर्णानि साम्प्रतं नो रणाजिरे

三阇耶说道:“我记得我们童年时的一切情状——彼此之间所有的举止与习惯。然而如今在这战场上,那些旧日的礼让与情分都已磨损殆尽。”

Verse 26

किमन्यत्क्रोधलोभाशभ्यां युद्धमेवाद्य सात्वत । त॑ तथावादिन तत्र सात्यकि: प्रत्यभाषत

三阇耶说道:“还能有什么——在愤怒与贪欲的驱使下——除了今日之战呢,噢,萨特瓦塔族的勇士?”于是当场,萨提耶吉回应了这般言辞之人。

Verse 27

नेयं सभा राजपुत्र नाचार्यस्य निवेशनम्‌

三阇耶说道:“王子啊,此处并非王廷议事之殿,也非师尊的居所。这是战争与凶险之地——莫将它误作商议之庭,或求学的庇护所。”

Verse 28

दुर्योधन उवाच क्व सा क्रीडा गतास्माकं बाल्ये वै शिनिपुड़व

杜尤陀那说道:“我们童年时的那份嬉戏之乐——曾一同玩耍的游戏——如今到哪里去了?噢,室尼族中的雄牛!”

Verse 29

कि नु नो विद्यते कृत्यं धनेन धनलिप्सया

杜尤陀那说道:“我们还有什么职责未尽——既被财富与对财富的贪欲所驱使?”

Verse 30

संजय उवाच त॑ तथावादिन तत्र राजानं माधवो<ब्रवीत्‌

三阇耶说道:随后,摩陀婆对那位如此言说的国王开口。他宣示:刹帝利自古之法,战事所迫,纵是可敬的长者与师长亦当交锋;并催促国王勿再迟疑——若真欲取悦于他,就当立刻出手,不可踌躇。

Verse 31

एवंवृत्तं सदा क्षात्रं युध्यन्तीह गुरूनपि । यदि ते<हं प्रियो राजन्‌ जहि मां मा चिरं कृथा:

三阇耶说道:“大王啊,武士之道自古如此:在此战场,连师长与尊长也要交战。若我为你所爱,大王啊,就立刻将我击倒——莫要迟延。”

Verse 32

त्वत्कृते सुकृताल्लॉँकान्‌ गच्छेयं भरतर्षभ । या ते शक्तिर्बलं यच्च तत्‌ क्षिप्रं मयि दर्शय

“婆罗多族中的雄牛啊,凭我侍奉你所积之功德,愿我得至善业所获之诸界。你所有的威力与力量——立刻向我显现吧。”

Verse 33

इत्येवं व्यक्तमा भाष्य प्रतिभाष्य च सात्यकि:

三阇耶说道:他既已如此明白陈言,又依次回辩,萨底耶吉便就此事再作申述。

Verse 34

तमायान्तं महाबाहें प्रत्यगृह्नलात्‌ तवात्मज:

三阇耶说道:“噢,大臂者!当他逼近前来时,你的儿子迎上前去——正面相接,承受其进逼。”

Verse 35

ततः प्रववृते युद्ध कुरुमाधवर्सिहयो:

于是,俱卢众与摩陀婆麾下那如雄牛般的英雄之间,战斗便展开了。

Verse 36

ततः पूर्णायतोत्सूष्टे: सात्वतं युद्धदुर्मदम्‌

三阇耶说道:随后,那一箭满弓劲发、猛然放出;萨特瓦塔的英雄——沉醉于战斗的烈焰——在战狂之中逼身向前。

Verse 37

त॑ सात्यकि: प्रत्यविध्यत्‌ तथैवावाकिरच्छरै:

三阇耶说道:萨底耶吉随即还击,同样以箭雨回敬,密密射向他。

Verse 38

पज्चाशता पुनश्चाजौ त्रिंशता दशभिश्न ह | इसी प्रकार सात्यकिने भी युद्धस्थलमें पहले पचास, फिर तीस और फिर दस बाणोंद्वारा दुर्योधनको बींध डाला और उसे भी अपने बाणोंकी वर्षासे ढक दिया ।।

三阇耶说道:在那场战斗中,他又一次刺穿了他——先以五十箭,继以三十箭,再以十箭。萨提亚基在阵中大笑,向你的儿子倾泻密如骤雨的箭矢,以万箭将其覆没。

Verse 39

ततो<स्य सशरं चापं क्षुरप्रेण द्विधाच्छिनत्‌

三阇耶说道:随后他以刃如剃刀的箭矢,将他的弓——连同所系之箭——一劈为二。于是萨提亚基迅疾执起另一张坚弓,手法如风,开始向你的儿子连番倾射箭雨,毫不停歇。

Verse 40

सोअन्यत्‌ कार्मुकमादाय लघुहस्तस्ततो दृढम्‌ । सात्यकिरव्यसृजच्चापि शरश्रेणीं सुतस्य ते

三阇耶说道:于是萨提亚基手疾如风,执起另一张坚弓,迅速向你的儿子连绵不断地射出一串箭矢。

Verse 41

तामापतन्तीं सहसा शरश्रेणीं जिघांसया । चिच्छेद बहुधा राजा तत उच्चुक्रुशुर्जना:,वधके लिये अपने ऊपर सहसा आती हुई उन बाण पंक्तियोंके राजा दुर्योधनने अनेक टुकड़े कर डाले; इससे सब लोग हर्षध्वनि करने लगे

三阇耶说道:怀着杀意,一阵箭雨骤然向他袭来。杜尤陀那王将那迎面而来的箭流斩成无数碎段;见此情景,众将士与观者齐声高呼喝彩。

Verse 42

सात्यकिं च त्रिसप्तत्या पीडयामास वेगित: । स्वर्णपुड्खै: शिलाधौतैराकर्णापूर्णनि:सृतै:

三阇耶说道:随后他以迅猛之势强压萨提亚基,连发七十三箭——金羽为翎,石磨般光洁,自弓弦拉至耳畔之满弓中迸射而出。

Verse 43

फिर शिलापर साफ किये हुए सुनहरी पाँखवाले तिहत्तर बाणोंसे, जो धनुषको कानतक खींचकर छोड़े गये थे, दुर्योधनने वेगपूर्वक सात्यकिको पीड़ित कर दिया ।।

三阇耶说道:随后,杜罗约陀那把弓拉至耳畔,疾射七十三支金翼之箭,箭杆磨砺如石般光洁;这阵迅猛的箭雨在战场上逼迫萨提耆基难以喘息。可当杜罗约陀那正要再搭一箭、执弓待发之际,萨提耆基立刻以箭斩断那支正被搭上的箭与承载它的弓,继而又以多支利箭贯穿杜罗约陀那,使其负伤。

Verse 44

स गाढविद्धो व्यथित: प्रत्यपायाद्‌ रथान्तरे | दुर्योधनो महाराज दाशाहशरपीडित:,महाराज! उस समय दुर्योधन सात्यकिके बाणोंसे गहरी चोट खाकर पीड़ित एवं व्यथित हो उठा और रथके भीतर चला गया

三阇耶说道:杜罗约陀那被射中甚深,痛楚震颤;在萨提耆基之箭的折磨下,他只得后退,退入自己战车的内厢。

Verse 45

समाश्चस्य तु पुत्रस्ते सात्यकिं पुनरभ्ययात्‌ । विसृजन्निषुजालानि युयुधानरथं प्रति,फिर धीरे-धीरे कुछ आराम मिलनेपर आपका पुत्र पुनः सात्यकिपर चढ़ आया और उनके रथपर बाणोंके जाल बिछाने लगा

三阇耶说道:待稍得喘息、重整心神之后,你的儿子又再冲向萨提耆基,朝尤尤陀那的战车倾泻如网般的箭雨。

Verse 46

तथैव सात्यकिर्बाणान्‌ दुर्योधनरथं प्रति । सततं विसृजन्‌ राजंस्तत्‌ संकुलमवर्तत

三阇耶说道:大王啊,同样地,萨提耆基也不断向杜罗约陀那的战车连发箭雨。正因这不间断的对射,那里的战斗遂化为纠缠密集的近身混战,愈发惨烈。

Verse 47

तत्रेषुभि: क्षिप्पमाणै: पतद्धिश्व॒ शरीरिषु । अग्नेरिव महाकक्षे शब्द: समभवन्महान्‌

三阇耶说道:在那里,疾射之箭落在有情之身上时,轰然巨响随之而起——宛如烈火在一大堆枯苇与干竹中爆裂噼啪,声震四野。

Verse 48

तयो: शरसहसैश्न संछन्न॑ं वसुधातलम्‌ | अगम्यरूपं च शरैराकाशं समपद्यत,उन दोनोंके हजारों बाणोंसे पृथ्वी ढक गयी और आकाशगमें भी बाणोंके कारण (पक्षियोंतकका) चलना-फिरना बंद हो गया

三阇耶说道:那二人所射出的千百支箭矢,竟将大地表面尽皆覆盖;而天空也被箭杆塞满,变得不可通行——以至连飞鸟都无法往来飞动。

Verse 49

तत्राप्यधिकमालक्ष्य माधवं रथसत्तमम्‌ | क्षिप्रमभ्यपतत्‌ कर्ण: परीप्संस्तनयं तव

三阇耶说道:即便在那处,迦尔那也清楚看见了摩陀婆——车战勇士中的最上者——便迅疾冲上前去,一心要逼近并击倒你的儿子。

Verse 50

उस युद्धमें महारथी सात्यकिको प्रबल होते देख कर्ण आपके पुत्रकी रक्षाके लिये शीघ्र ही बीचमें कूद पड़ा ।।

在那场战斗中,见大车战士萨底耶吉势头正盛,迦尔那为护卫你的儿子,立刻跃入其间。然而大力的毗摩塞那无法容忍此举,便在万箭齐发之中迅速向迦尔那猛扑而去。

Verse 51

तस्य कर्ण: शितान्‌ बाणान्‌ प्रतिहत्य हसन्निव । धनु: शरांश्व चिच्छेद सूतं चाभ्यहनच्छरै:

三阇耶说道:迦尔那仿佛含笑一般,尽数格挡并摧毁对手的锐箭。继而他斩断其弓与箭,又以箭雨射杀了车夫。

Verse 52

भीमसेनस्तु संक्रुद्धो गदामादाय पाण्डव: । ध्वजं धनुश्न सूतं च सम्ममर्दाहवे रिपो:

三阇耶说道:般度之子毗摩塞那怒火中烧,执起铁杵,在战阵之中将敌人的旗幡、弓与车夫一并碾碎击溃。

Verse 53

रथचक्रं च कर्णस्य बभञठ्ज स महाबल: । भग्नचक्रे रथेडतिष्ठदकम्प: शैलराडिव,इतना ही नहीं, महाबली भीमने कर्णके रथका एक पहिया भी तोड़ डाला तो भी कर्ण टूटे पहियेवाले उस रथपर गिरिराजके समान अविचलभावसे खड़ा रहा

桑阇耶说道:大力的毗摩击碎了迦尔那战车的一只车轮。即便车轮已断,迦尔那仍稳立车上——不为所动,宛如群山之王。

Verse 54

एकचक्रं रथं तस्य तमूहुः सुचिरं हया: । एकचक्रमिवार्कस्य रथं सप्त हया यथा,कर्णके घोड़े उसके एक पहियेवाले रथको बहुत देरतक ढोते रहे, मानो सूर्यके सात अश्व उनके एक चक्रवाले रथको खींच रहे हैं

桑阇耶说道:他的战车虽只剩一轮,却仍被群马载行良久——恰如太阳那一轮之车,由七骏牵引。

Verse 55

अमृष्यमाण: कर्णस्तु भीमसेनमयुध्यत । विविधैरिषुजालैश्न नानाशस्त्रैश्व संयुगे

桑阇耶说道:迦尔那再也无法忍受毗摩军那的威势,便与之交战。于鏖战之中,他以千般箭雨如网,又以诸般兵器相攻,在战场上步步紧逼。

Verse 56

भीमसेनस्तु संक़्रुद्ध: सूतपुत्रमयोधयत्‌ । तस्मिंस्तथा वर्तमाने क्रुद्धो धर्मसुतो5ब्रवीत्‌

桑阇耶说道:毗摩军那怒火炽盛,与御者之子(迦尔那)交战。正当这场凶猛的对决展开之际,法之子(坚战,Yudhiṣṭhira)亦含怒开口说道。

Verse 57

ये नः प्राणा: शिरो ये च ये नो योधा महारथा:

桑阇耶说道:“那些是我等的性命之息、仿佛我等之首的英雄——诸位最卓绝的大车战士——正与持国之子们鏖战。你们为何还像愚昧无知之人一般站在这里?”

Verse 58

त एते धार्तराष्ट्रेषु विषक्ता: पुरुषर्षभा: । कि तिष्ठत यथा मूढा: सर्वे विगतचेतस:

三阇耶说道:“那些如雄牛般的英雄——是我们的性命与冠冕——正与持国之子鏖战相缠。你们为何还像迷妄之人一般站在此处,个个丧失决断?”

Verse 59

तत्र गच्छत यज्रैते युध्यन्ते मामका रथा: । क्षात्रधर्म पुरस्कृत्य सर्व एव गतज्वरा:,“वहाँ जाओ, जहाँ ये मेरे सब रथी क्षत्रियधर्मको सामने रखकर निश्चिन्तभावसे युद्ध कर रहे हैं

三阇耶说道:“去那里——去我方诸车战士交锋之处。以刹帝利之法为先,他们都已抛却忧惧,投入战斗。”

Verse 60

जयन्तो वध्यमानाक्ष गतिमिष्टां गमिष्यथ । जित्वा वा बहुभिर्यज्ञैर्यजध्वं भूरिदक्षिणै:

三阇耶说道:“噢,阇延多!噢,伐陀耶摩那阿叉!你们必将达到所愿之境。或若得胜,便当举行众多祭祀,广施厚赐。”

Verse 61

हता वा देवसाद्‌ भूत्वा लोकानू प्राप्स्थथ पुष्कलान्‌ । “तुमलोग विजयी होओ अथवा मारे जाओ

三阇耶说道:“无论你们得胜,还是被杀,在两种境况中都将获得至上的归趣。若你们征服,便以厚赐之供养,举行众多祭祀,以奉事主宰——祭祀之人(Yajña-Puruṣa);若你们战死,便将如天神一般,抵达无数功德之界。”王如此激励,那些英勇的大车战士便整装欲战。

Verse 62

क्षात्रधर्म पुरस्कृत्य त्वरिता द्रोणमभ्ययु: । राजा युधिष्ठिरसे इस प्रकार प्रेरित हो उन वीर महारथियोंने युद्धके लिये उद्यत होकर क्षत्रियधर्मको सामने रखते हुए बड़ी उतावलीके साथ द्रोणाचार्यपर आक्रमण किया ।।

在国王如此催促之下,那些英勇的大车战士以刹帝利之法为先,急速奔赴,向德罗那阿阇梨发起进攻,投入战斗。

Verse 63

आसंस्तु पाण्डुपुत्राणां त्रयो जिह्मा महारथा:

桑阇耶说道:在般度之子中,有三位大车战士性情狡黠、行事迂回。那三人——那俱罗、萨诃提婆与毗摩塞那——呼唤阿周那道:“阿周那,快跑——快跑!速速将这些俱卢人从德罗纳阿阇梨身旁驱散!”

Verse 64

यमौ च भीमसेनश्ष प्राक्रोशंस्ते धनंजयम्‌ । अभिद्रवार्जुन क्षिप्रं कुरून्‌ द्रोणादपानुद

桑阇耶说道:那俱罗与萨诃提婆,连同毗摩塞那,高声呼唤檀那阇耶(阿周那):“阿周那,快冲上去——立刻!把这些俱卢人从德罗纳身边赶开!”

Verse 65

तत एनं हनिष्यन्ति पठ्चाला हतरक्षिणम्‌ | कौरवेयांस्तत: पार्थ: सहसा समुपाद्रवत्‌,“जब इनके रक्षक मारे जायँगे, तभी पांचाल वीर इन्हें मार सकेंगे।! तब अर्जुनने सहसा कौरवयोद्धाओंपर आक्रमण किया

桑阇耶说道:“唯有当他的护卫被杀尽,般遮罗的勇士们方能杀他。”于是帕尔塔(阿周那)骤然决断,迅疾冲向俱卢诸战士,发起猛攻。

Verse 66

पज्चालानेव तु द्रोणो धृष्टद्युम्नपुरोगमान्‌ । ममर्दुस्तरसा वीरा: पठचमे5हनि भारत

桑阇耶说道:然而德罗纳却转而猛压般遮罗军,前锋由持利湿陀优摩那率领。噢,婆罗多!在那第五日的战斗中,诸英雄被狂烈的势头驱使,在战阵拥挤处彼此碾压践踏。

Verse 186

दुर्योधनो महाराज किर|ञष्छोणित भोजनान्‌ । महाराज! रणदुर्मद धृष्टद्युम्नको द्रोणाचार्यकी ओर जाते और अपने दलके उन चारों वीरोंको नकुल-सहदेवके साथ युद्ध करते देख राजा दुर्योधन रक्त पीनेवाले बाणोंकी वर्षा करता हुआ उनके बीचमें आ धमका

桑阇耶说道:大王啊,见到战意癫狂的持利湿陀优摩那正向德罗纳逼近,又见己方那四名勇士与那俱罗、萨诃提婆交战在一起,杜尤陀那王便闯入其间,箭雨倾泻,仿佛那些箭矢饮血而生。

Verse 189

इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणवधपर्वणि संकुलयुद्धे एकोननवत्यधिकशततमो<ध्याय:

如是,在《圣摩诃婆罗多》中,于《德罗那篇》之内——尤指“诛德罗那”之章——叙述那纷乱纠缠之战的第一百九十一章至此告终。此结语为叙事之转折作标记,提醒听者:当战事围绕德罗那之陨落而愈加激烈之时,战争的道德秩序已被逼迫至紧绷,渐趋紊乱。

Verse 263

प्रहसन्‌ विशिखांस्तीक्ष्णानुद्यम्य परमास्त्रवित्‌ । 'सात्वत वीर! आजका यह युद्ध ही क्रोध और लोभके सिवा दूसरा क्या है?” उत्तम अस्त्रोंके ज्ञाता सात्यकिने हँसते हुए तीखे बाणोंको ऊपर उठाकर वहाँ पूर्वोक्त बातें करनेवाले दुर्योधनको इस प्रकार उत्तर दिया--

三阇耶曰:那通晓无上兵器者含笑举起锋利之箭。为答复方才说出那番话的难敌,善知上等飞矢的萨底耶吉扬起锐利箭簇,如此作答,驳斥其言“今日之战不过是嗔怒与贪欲而已”。

Verse 276

यत्र क्रीडितमस्माभिस्तदा राजन्‌ समागतै: । “राजकुमार! कौरवनरेश! न तो यह सभा है और न आचार्यका घर ही है जहाँ एकत्र होकर हम सब लोग खेला करते थे”

三阇耶曰:“大王啊,此处既非当年之议事堂,亦非师长之宅邸;那时我等诸王子曾在彼处聚会嬉戏,情谊无忧。如今眼前之景,已属另一种秩序——青春与亲族之纽带,尽被战争与职责的严酷要求所遮蔽。”

Verse 283

क्व च युद्धमिदं भूय: “कालो हि दुरतिक्रम:” । दुर्योधन बोला--शिनिप्रवर! हमारा बचपनका वह खेल कहाँ चला गया और फिर यह युद्ध कहाँसे आ धमका? हाय! कालका उल्लंघन करना अत्यन्त ही कठिन है

难敌曰:“尸尼族之俊杰啊,我等童年嬉戏今在何处?而此战争又从何处再度临头?哀哉——迦罗(时间)实难逾越。”在毁灭之中,他亦觉察到骨肉相残的道德悲剧,以及迦罗那不可抗拒之力,驱使万事超出个人所能掌控。

Verse 293

यत्र युध्यामहे सर्वे धनलो भात्‌ समागता: । हमें धनसे या धन पानेकी इच्छासे क्‍या प्रयोजन है? जो हम सब लोग यहाँ धनके लोभसे एकत्र होकर जूझ रहे हैं

难敌曰:“在此我等皆投入战斗,乃因贪求财物而聚集。”就其语境而言,此句揭露了战争的道德腐蚀:它不再被框定为正当之义务,而被呈现为由占有欲驱动的争夺,含蓄地质问此等动机的伦理正当性。

Verse 326

नेच्छामि तदहं द्रष्टं मित्राणां व्यसनं महत्‌ । “भरतश्रेष्ठ! तुम्हारे ऐसा करनेपर मैं पुण्यवानोंके लोकोंमें जाऊँगा। तुममें जितनी शक्ति और बल है

三阇耶说道:“我不愿目睹那巨大的灾厄降临在我的友人身上。愿结局如此,使我不必站在一旁,看着我所珍爱的人陷入毁灭。”

Verse 336

अभ्ययात्‌ तूर्णमव्यग्रो दयां नाकुरुतात्मनि । इस प्रकार स्पष्ट बोलकर दुर्योधनकी बातका उत्तर दे सात्यकि निःशंक होकर तुरंत आगे बढ़े, उन्होंने अपने ऊपर दया नहीं दिखायी

三阇耶说道:萨底耶迦不惊不惧、毫不迟疑,立刻向前推进。他如此清晰地答复了都利约陀那的话,便不曾怜惜自身——在正法之战的召唤中,宁取决然行动,不纵容恐惧与软弱。

Verse 343

शरैश्वावाकिरद्‌ राजन्‌ शैनेयं तनयस्तव । राजन्‌! सामने आते हुए उन महाबाहु सात्यकिको आपके पुत्रने रोका और उन्हें बाणोंसे ढक दिया

三阇耶说道:大王啊,你的儿子在善尼耶前出之时将他拦住,并以箭雨倾泻,密密麻麻地覆盖了那臂力雄伟的萨底耶迦。

Verse 356

अन्योनयं क्रुद्धयोर्घोरं यथा द्विरद्सिंहयो: । तदनन्तर हाथी और सिंहके समान क्रोधमें भरे हुए उन कुरुवंशी और मधुवंशी सिंहोंमें परस्पर घोर युद्ध होने लगा

三阇耶说道:随后,如狂象与猛狮相搏,那些怒火充盈的勇士——出自俱卢一脉与摩度(雅陀婆)一脉——彼此之间展开了可怖的厮杀。

Verse 363

दुर्योधन: प्रत्यविध्यत्‌ कुपितो दशभि: शरै: । तत्पश्चात्‌ कुपित हुए दुर्योधनने धनुषको पूर्णतः खींचकर छोड़े गये दस बाणोंद्वारा रणदुर्मद सात्यकिको घायल कर दिया

三阇耶说道:都利约陀那盛怒之下反击,以十支箭矢贯穿其敌。战阵逼迫之中,他的怒意化作严整的弓术,射伤了那沉醉于厮杀的萨底耶迦,使争斗在报复中继续向前推进。

Verse 386

आकर्णपूर्णनिशितैर्विव्याध त्रिंशता शरै: । राजन! तब हँसते हुए आपके पुत्रने धनुषको कानतक खींचकर छोड़े हुए तीस तीखे बाणोंद्वारा रणभूमिमें सात्यकिको क्षत-विक्षत कर डाला

三阇耶说道:大王啊,随后你的儿子含笑引弓至耳,放出三十支锋利如剃刀的箭矢。凭这些箭,他在战场上撕裂萨底耆,使其遍体创伤、血肉狼藉。

Verse 563

पज्चालानां नरव्याप्रान्‌ मत्स्यांश्व पुरुषर्षभान्‌ । इससे भीमसेन अत्यन्त कुपित हो उठे और सुतपुत्र कर्णके साथ घोर युद्ध करने लगे। इस प्रकार जब वह युद्ध चल रहा था

三阇耶说道:尤提施提罗向般遮罗的英雄——人中之狮——以及摩蹉的战士——人中之雄牛——发言。战斗正酣之际,毗摩塞那怒火炽盛,与迦尔那展开惨烈决斗;就在同一时刻,法之子尤提施提罗亦满怀愤激,对那些般遮罗与摩蹉的勇士们开口说道。

Verse 626

भीमसेनपुरोगाश्चाप्पेकत: पर्यवारयन्‌ । एक ओरसे पांचाल वीर तीखे बाणोंसे द्रोणाचार्यको मारने लगे और दूसरी ओरसे भीमसेन आदि वीरोंने उन्हें घेर रखा था

三阇耶说道:以毗摩塞那为先,众勇士从一侧逼近,将德罗纳围困起来;而从另一方向,般遮罗的健儿放出锐利箭矢,猛攻欲取德罗纳阿阇梨之命。于是,在战斗的狂潮中,德罗纳同时遭受围攻与包围。

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