भीष्मशिबिरगमनम् — Duryodhana’s Visit to Bhīṣma’s Camp and the Command Appeal
ऐरावतेन सा दत्ता अनपत्या महात्मना । पतौ हते सुपर्णेन कृपणा दीनचेतना,नागराजकी वह पुत्री संतानहीन थी। उसके मनोनीत पतिको- गरुड़ने मार डाला था, जिससे वह अत्यन्त दीन एवं दयनीय हो रही थी। ऐरावतवंशी कौरव्यनागने उसे अर्जुनको अर्पित किया और अर्जुनने कामके अधीन हुई उस नागकन्याको भारयर्िपमें ग्रहण किया था। इस प्रकार यह अर्जुनपुत्र उत्पन्न हुआ था। वह सदा मातृकुलमें ही रहा
sañjaya uvāca | airāvatena sā dattā anapatyā mahātmanā | patau hate suparṇena kṛpaṇā dīnacetanā ||
三阇耶说道:那位出自爱罗婆多一脉的高贵者将她嫁出——她本无子嗣。她所择之夫被苏帕尔那(迦楼罗)所杀后,她凄苦可怜,心神沉入悲恸与无助之中。
संजय उवाच