Puruṣottama-yoga
The Discipline of the Supreme Person) — Chapter 15 (Bhagavadgītā
सम्बन्ध-- इस प्रकार अ्जुनके वचन सुनकर अब भगवान् दो श*्लोकोद्वारा अपने च॒दुर्धुज देवरूपके दर्शनकी दुर्लभता और उसकी महिमाका वर्णन करते श्रीभगवानुवाच सुदुर्दर्शमिदं रूप॑ दृष्टवानसि यन्मम । देवा अप्यस्य रूपस्य नित्यं दर्शनकाड्क्षिण:,श्रीभगवान् बोले--मेरा जो चतुर्भुजरूप तुमने देखा है, वह सुदुर्दर्श है अर्थात् इसके दर्शन बड़े ही दुर्लभ हैं। देवता भी सदा इस रूपके दर्शनकी आकांक्षा करते रहते हैं
śrībhagavān uvāca
sudurdarśam idaṁ rūpaṁ dṛṣṭavān asi yan mama |
devā apy asya rūpasya nityaṁ darśanakāṅkṣiṇaḥ ||
世尊说:“你所见到的我之此形,极难得见。即便诸天,也常常渴望得见此形。”
अजुन उवाच