उत्पातवर्णनम् (Utpāta-varṇanam) — Catalogue of Portents
धर्म्य देशय पन्थानं समर्थों ह्सि वारणे । क्षुद्रे जातिवरध॑ प्राहुर्मा कुरुष्व ममाप्रियम्,“राजन! तुम अपने जाति-भाई, कौरवों, सगे-सम्बन्धियों तथा हितैषी-सुहृदोंको धर्मानुकूल मार्गका उपदेश करो; क्योंकि तुम उन सबको रोकनेमें समर्थ हो। जाति-वधको अत्यन्त नीच कर्म बताया गया है। वह मुझे अत्यन्त अप्रिय है। तुम यह अप्रिय कार्य न करो
dharmaṃ deśaya panthānaṃ samartho 'si vāraṇe | kṣudre jātivadhāḥ prāhur mā kuruṣva mamāpriyam ||
毗湿摩波耶那说:“教导他们走正法之路。你有能力约束他们。杀害同族被宣称为最卑劣之业——此事令我深恶痛绝。切莫犯下这沉重的罪行。”
वैशम्पायन उवाच