Karma-Saṃnyāsa–Karma-Yoga Saṃvāda
Renunciation and the Discipline of Action
सम्बन्ध-- पूर्वश्लीकर्में यह बात कही गयी कि कोई भी मनुष्य क्षणमात्र भी कर्म किये बिना नहीं रहता: इसपर यह शंका होती है कि इन्द्रियोंकी क्रियाओंकोी हठसे रोककर भी तो मनुष्य कमोंका त्याग कर सकता है। इसपर कहते हैं-- कर्मेन्द्रियाणिः संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन् | इन्द्रियार्थान् विमूढात्मा मिथ्याचार: स उच्यते,जो मूढबुद्धि मनुष्य समस्त इन्द्रियोंको हठपूर्वक ऊपरसे रोककर मनसे उन इन्द्रियोंके विषयोंका चिन्तन करता रहता है, वह मिथ्याचारी अर्थात् दम्भी कहा जाता है
arjuna uvāca | karmendriyāṇi saṁyamya ya āste manasā smaran | indriyārthān vimūḍhātmā mithyācāraḥ sa ucyate ||
若有人强行约束行动诸根,却端坐而心中仍念念不忘诸欲境,此人见解迷妄,被称为伪行者;因其外示出离,而内怀贪著。
अजुन उवाच