Karma-Saṃnyāsa–Karma-Yoga Saṃvāda
Renunciation and the Discipline of Action
सम्बन्ध-- पूर्वश्लोकम्ें यह बात कही गयी कि भगवान्के मतके अनुसार न चलनेवाला नष्ट हो जाता है। इसपर यह जिज्ञासा होती है कि यदि कोई भगवान्के मतके अनुसार कर्म न करके हठपूर्वक कर्मोका सर्वथा त्याग कर दे तो क्या हानि है? इसपर कहते हैं-- सदृशं चेष्टते स्वस्या: प्रकृतेज्ञानवानपि । प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रह: कि करिष्यति,सभी प्राणी प्रकृतिको प्राप्त होते हैं अर्थात् अपने स्वभावके परवश हुए कर्म करते हैंः। ज्ञानवान् भी अपनी प्रकृतिके अनुसार चेष्टा करता है, फिर इसमें किसीका हठ क्या करेगा?
sadṛśaṁ ceṣṭate svasyāḥ prakṛter jñānavān api | prakṛtiṁ yānti bhūtāni nigrahaḥ kiṁ kariṣyati ||
阿周那说:即便有智之人,也依自身本性而行。一切众生随其天赋禀性而转;那么,单凭克制又能成就什么呢?
अजुन उवाच