Bhīṣma-nipāta-saṃvāda — Sañjaya’s Report of Bhīṣma’s Fall (भीष्मनिपातसंवादः)
पहलेकी बात है, दानवोंका संहार करनेवाले सम्पूर्ण देवताओंने जिन मेरे महान् व्रतधारी पिता रणदुर्मद भीष्मजीको अपना सहायक बनानेकी अभिलाषा की थी, जिन महापराक्रमी पुत्र॒रत्नके जन्म लेनेपर लोकविख्यात महाराज शान्तनुने शोक, दीनता और दुःखका सदाके लिये त्याग कर दिया था, जो सबके आश्रयदाता, बुद्धिमान्, स्वधर्मपरायण, पवित्र और वेदवेदांगोंके तत्त्वज्ञ बताये गये हैं, उन्हीं भीष्मको तुम मारा गया कैसे बता रहे हो? ।। सर्वस्त्रिविनयोपेतं शान्तं दान्तं मनस्विनम् । हतं शान्तनवं श्रुत्वा मन्ये शेषं हतं बलम्,जो सम्पूर्ण अस्त्र-शस्त्रोंकी शिक्षासे सम्पन्न, शान्त, जितेन्द्रिय और मनस्वी थे, उन शान्तनुनन्दन भीष्मको मारा गया सुनकर मुझे यह विश्वास हो गया कि अब हमारी सारी सेना मार दी गयी
dhṛtarāṣṭra uvāca | sarvāstravinayopetaṃ śāntaṃ dāntaṃ manasvinam | hataṃ śāntanavaṃ śrutvā manye śeṣaṃ hataṃ balam ||
持国王说道:“往昔,我父亲毗湿摩——立大誓者、诛灭达那婆者,诸天都渴望在战场上得其为助——正是那位无比英勇的‘子中宝玉’;他一诞生,名闻世间的商檀奴王便永远抛却悲恸、卑屈与痛苦。人们称他为众生所依,智者,专守自家之法,清净无垢,通晓吠陀与吠陀支的真髓;你怎能说毗湿摩已被杀?而当我听闻商檀奴之子毗湿摩——精通一切兵器之训,安宁寂定,克己制心,志气高迈——竟已陨落,我便确信:我军所余之力,也已等同覆灭。”
धृतराष्ट उवाच