धृतराष्ट्रस्य पश्चात्तापः तथा वनप्रस्थानानुज्ञा | Dhṛtarāṣṭra’s Remorse and Request for Forest-Retirement
विविधस्य महाराज विपरीत विवर्जये: । “तात! चक्रकी भाँति सदा कार्योंका क्रम चलता रहता है
“孩子啊!如车轮一般,诸事之次第恒常运转不息,此乃人所共见。大王啊,为聚敛多种国库之财,当常以正法而勤勉;与此相反之不义之求,当悉皆舍弃。”
वैशम्पायन उवाच