Āpava
Vasiṣṭha) and the Vasus: the Kāmadhenu Theft and the Curse (Śaṃtanu–Gaṅgā Saṃvāda
ययातिरुवाच अनिकेतो गृहस्थेषु कामवृत्तेषु संयत: । ग्राम एव वसनू् भिक्षुस्तयो: पूर्वतरं गत:,ययाति बोले--कामवृत्तिवाले गृहस्थोंके बीच ग्राममें ही वास करते हुए भी जो जितेन्द्रिय और गृहरहित संन्यासी है, वही उन दोनों प्रकारके मुनियोंमें पहले ब्रह्मभावको प्राप्त होता है
耶耶提说道:“在追逐欲乐的居士之间,即便仍住于村落之中,那无家而居、摄持诸根的比丘出家者,正是这两类牟尼之中最先证得梵境者。”
जटद्टक उवाच