Paurava-vaṃśa-kathana (Account of the Paurava Lineage) | महाभारत आदि पर्व अध्याय ८९
नचापि त्वां धृष्णुम: प्रष्टमग्रे न च त्वमस्मान् पृच्छसि ये वयं सम: । तत् त्वां पृच्छामि स्पृहणीयरूप कस्य त्वं वा किंनिमित्तं त्वमागा:,हम पहले तुमसे कुछ पूछनेका साहस नहीं कर सकते और तुम भी हमसे हमारा परिचय नहीं पूछते हो; कि हम कौन हैं? इसलिये मैं ही तुमसे पूछता हूँ। मनोरम रूपवाले महापुरुष! तुम किसके पुत्र हो? और किसलिये यहाँ आये हो?
na cāpi tvāṃ dhṛṣṇumaḥ praṣṭum agre na ca tvam asmān pṛcchasi ye vayaṃ samaḥ | tat tvāṃ pṛcchāmi spṛhaṇīyarūpa kasya tvaṃ vā kiṃnimittaṃ tvam āgāḥ ||
我等不敢先行发问,而你亦不问我等是谁,虽在礼数上彼此相当。故由我来问:噫,形容可敬之大丈夫!你是谁之子?又为何缘故来到此处?
अट्क उवाच