Duḥṣantasya Vana-praveśaḥ
King Duḥṣanta’s Entry into the Forest Hunt
तीर्थयात्रां परिक्रामन्नपश्यद् वै पराशर: । अतीवरूपसम्पन्नां सिद्धानामपि काड्क्षिताम्,वह रूप और सत्त्व (सत्य)-से संयुक्त तथा समस्त सदगुणोंसे सम्पन्न होनेके कारण 'सत्यवती” नामसे प्रसिद्ध हुई। मछेरोंके आश्रयमें रहनेके कारण वह पवित्र मुसकानवाली कन्या कुछ कालतक मत्स्यगन्धा नामसे ही विख्यात रही। वह पिताकी सेवाके लिये यमुनाजीके जलमें नाव चलाया करती थी। एक दिन तीर्थयात्राके उद्देश्स्से सब ओर विचरनेवाले महर्षि पराशरने उसे देखा। वह अतिशय रूप-सौन्दर्यसे सुशोभित थी। सिद्धोंके हृदयमें भी उसे पानेकी अभिलाषा जाग उठती थी
tīrthayātrāṃ parikrāmann apaśyad vai parāśaraḥ | atīvarūpasampannāṃ siddhānām api kāṅkṣitām ||
毗湿摩波衍那说:圣者波罗舍罗在朝圣巡游之时,往来于一处处神圣渡口之间,见到一位少女,容色绝伦——其魅力之盛,连已臻成就的悉地者(Siddha)亦会心生渴慕,欲得其人。叙事由此点明:感官之诱引即便在灵性修持甚高的境域中亦能骤然生起,并为苦行的自制与欲望之间的道德张力铺陈开端。
वैशम्पायन उवाच