आदि पर्व, अध्याय ३८ — शमीक-उपदेशः, शाप-संदेशः, तक्षक-प्रसङ्गः (Śamīka’s counsel, the curse-message, and Takṣaka’s approach)
ब्रह्मोवाच बहव: पन्नगास्ती क्ष्णा घोररूपा विषोल्बणा: । प्रजानां हितकामो5हं न च वारितवांस्तदा,ब्रह्माजीने कहा--इन दिनों भयानक रूप और प्रचण्ड विषवाले क्रूर सर्प बहुत हो गये हैं (जो प्रजाको कष्ट दे रहे हैं)। मैंने प्रजाजनोंके हितकी इच्छासे ही उस समय कद्रूको मना नहीं किया
梵天说道:“如今毒蛇众多,形貌可怖,性情凶残,毒性猛烈,正使众生受苦。为求万民之利,当时我便没有阻止迦德茹。”
शेष उवाच