Śārṅgakānāṃ Avināśaḥ (Why the Śārṅga Birds Were Spared) | शार्ङ्गकानामविनाशः
क्लृप्तानां पटुघण्टानां चारूणां हेममालिनाम् | हस्त्यारोहैरुपेतानां सहस्नं साहसप्रिय:,जिन्हें साहसका काम प्रिय है और जो हाथमें हल धारण करते हैं, उन बलरामने प्रसन्न होकर इस नूतन सम्बन्धका आदर करते हुए अर्जुनको पाणिग्रहणके दहेजके रूपमें एक हजार मतवाले हाथी भेंट किये, जो तीन अंगोंसे मदकी धारा बहानेवाले थे। वे हाथी युद्धमें कभी पीछे नहीं हटते थे और देखनेमें पर्वतशिखरके समान जान पड़ते थे। उनके मस्तकोंपर सुन्दर वेषरचना की गयी थी। उन सबके पार्श्वभागमें मजबूत घण्टे लटक रहे थे तथा गलेमें सोनेके हार शोभा दे रहे थे। वे सभी हाथी बड़े सुन्दर लगते थे और उन सबके साथ महावत थे
vaiśampāyana uvāca |
klṛptānāṁ paṭu-ghaṇṭānāṁ cārūṇāṁ hema-mālinām |
hasty-ārohair upetānāṁ sahasraṁ sāhasa-priyaḥ ||
毗湿摩耶那说道:他乐于壮举,为尊崇这新结的盟约,献上一千头华美之象作为婚礼聘赠——象身悬挂牢固的强铃,颈佩金色花鬘,并有娴熟的驭象者随侍。此礼公开昭示两族之纽带,也彰显王者的慷慨:财富与权势并非徒为炫耀,而是用以封缄关系、责任与相互敬重。
वैशम्पायन उवाच