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Shloka 17

समन्तपञ्चक-आख्यानम् तथा अक्षौहिणी-प्रमाणनिर्णयः

Samantapañcaka Narrative and the Measure of an Akṣauhiṇī

ऋषय ऊचु: अक्षौहिण्य इति प्रोक्तं यत्त्या सूतनन्दन । एतदिच्छामहे श्रोतुं सर्वमेव यथातथम्‌,ऋषियोंने पूछा--सूतनन्दन! अभी-अभी आपने जो अक्षौहिणी शब्दका उच्चारण किया है, इसके सम्बन्धमें हमलोग सारी बातें यथार्थरूपसे सुनना चाहते हैं

诸仙人问道:“苏多之子啊,你方才说到‘阿克绍希尼’(akṣauhiṇī)一词。我们愿闻其详——一切如实,无所遗漏。”

राम उवाच