समुद्रवर्णनम् (Description of the Ocean) — Kadrū and Vinatā approach the sea
ततोअम्बराच्चिन्तितमात्रमागतं महाप्रभं चक्रममित्रतापनम् । विभावसोस्तुल्यमकुण्ठमण्डलं सुदर्शन॑ संयति भीमदर्शनम्,चिन्तन करते ही शत्रुओंको संताप देनेवाला अत्यन्त तेजस्वी चक्र आकाशमार्गसे उनके हाथमें आ गया। वह सूर्य एवं अग्निके समान जाज्वल्यमान हो रहा था। उस मण्डलाकार चक्रकी गति कहीं भी कुण्ठित नहीं होती थी। उसका नाम तो सुदर्शन था, किंतु वह युद्धमें शत्रुओंके लिये अत्यन्त भयंकर दिखायी देता था
tato 'mbarāc cintitamātram āgataṁ mahāprabhaṁ cakram amitrātāpanam | vibhāvasos tulyam akuṇṭhamaṇḍalaṁ sudarśanaṁ saṁyati bhīmadarśanam ||
随即,只在心中一念,那灼烧仇敌、光辉无上的神轮便循天路飞至其手。它炽烈如日如火;其圆刃行进之时从不迟滞,亦无所阻。虽名“苏达尔沙那”(意为“悦目可观”),在战阵之中却令敌人望之胆寒。
शौनक उवाच