दुपद उवाच इदं सज्यं धनु: कृत्वा सज्जैरेभिश्व सायकै: । अतीत्य लक्ष्यं यो वेद्धा स लब्धा मत्सुतामिति,द्रपदने घोषणा की--जो वीर इस धनुषपर प्रत्यंचा चढ़ाकर इन प्रस्तुत बाणोंद्वारा ही यन्त्रके छेदके भीतरसे इसे लाँधघकर लक्ष्यवेध करेगा, वही मेरी पुत्रीको प्राप्त कर सकेगा
德鲁帕达宣告道:“凡能将此已备之弓上弦,并以此处所备之箭,自机关之孔中穿越而射中靶心者,此勇士便可得我之女。”
दुपद उवाच