Saṃvaraṇa’s Petition and Tapatī’s Conditioned Consent (सम्वरण-तपती संवादः)
आगततस्य गृहं त्यागस्तथैव शरणार्थिन: । याचमानस्य च वधो नृशंसो गर्हितो बुधै:,यदि मैंने जान-बूझकर ब्राह्मणका वध करा दिया तो वह बड़ा ही नीच और क्रूरतापूर्ण कर्म होगा। उससे छुटकारा पानेका कोई उपाय मुझे नहीं सूझता। घरपर आये हुए तथा शरणार्थीका त्याग और अपनी रक्षाके लिये याचना करनेवालेका वध--यह विद्दानोंकी रायमें अत्यन्त क्रूर एवं निन्दित कर्म है
āgatatasya gṛhaṃ tyāgas tathaiva śaraṇārthinaḥ | yācamānasya ca vadho nṛśaṃso garhito budhaiḥ ||
婆罗门说道:“将来至家门之人拒之门外,舍弃求庇护者,杀害乞求保护之人——此等行径残忍,且为智者所谴责。”
ब्राह्मण उवाच