Hiḍimba’s Approach and Hiḍimbā’s Warning to Bhīmasena (हिडिम्बागमनम् / हिडिम्बा-भयवचनम्)
प्रत्युत्थानासनाद्येन सम्प्रदानेन केनचित् । प्रतिविश्रब्धघाती स्यात् ती3्षणदंष्टो निमग्नक:,(शत्रुके) आनेपर उठकर अगवानी करे, आसन और भोजन दे और कोई प्रिय वस्तु भेंट करे। ऐसे बर्तावोंसे अपने प्रति जिसका पूर्ण विश्वास हो गया हो, उसे भी (अपने लाभके लिये) मारनेमें संकोच न करे। सर्पकी भाँति तीखे दाँतोंसे काटे, जिससे शत्रु फिर उठकर बैठ न सके
pratyutthānāsanādyena sampradānena kenacit | prativiśrabdhaghātī syāt tīkṣṇadaṃṣṭro nimagnakaḥ ||
迦尼迦说道:起身迎接、让座,并赠予礼物或施以殷勤之惠,便可博取他人的信任。待敌人因此全然信服之时,若为己利,便不应迟疑,当将其击倒。犹如利牙之蛇,一口咬下,使其再也不能起身。
कणिक उवाच