Jatugṛha-dāhānantara-vṛttāntaḥ
Aftermath of the Lac House Fire
भवतां च यथा जन्म तदप्यागमितं मया । सकुण्डलं सकवचं सर्वलक्षणलक्षितम् | कथमादित्यसदृशं मृगी व्यात्रं जनिष्यति,“तुम सब भाइयोंका जन्म जिस प्रकार हुआ है, वह भी मुझे अच्छी तरह मालूम है। समस्त शुभ लक्षणोंसे सुशोभित तथा कुण्डल और कवचके साथ उत्पन्न हुआ सूर्यके समान तेजस्वी कर्ण किसी सूत जातिकी स्त्रीका पुत्र कैसे हो सकता है। क्या कोई हरिणी अपने पेटसे बाघ पैदा कर सकती है?
bhavatāṁ ca yathā janma tad apy āgamitaṁ mayā | sakuṇḍalaṁ sakavacaṁ sarvalakṣaṇalakṣitam | katham ādityasadṛśaṁ mṛgī vyāghraṁ janiṣyati |
毗舍波耶那说道:“你们兄弟如何降生,我也知之甚详。我还知道:迦尔那光辉如日,甫一出生便佩有耳环并披天生甲胄,具足一切吉祥之相。如此如太阳般的人,怎会是苏多族女子之子?母鹿岂能产下猛虎?”
वैशम्पायन उवाच