Droṇotpattiḥ and Dhanurveda-Prāpti
Origin of Droṇa and Acquisition of Martial Science
इस प्रकार श्रीमह्माभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें पाण्डु-पृथा-संवादाविषयक एक सौ उन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ११९ ॥। ऑपन-माज बक। डे $. बन्धु शब्दका अर्थ संस्कृत-शब्दार्थकौस्तुभमें आत्मबन्धु, पितृबन्धु, मातृबन्धु माना गया है, इसलिये बन्धुका अर्थ कुटुम्बी किया है। दायादका अर्थ उसी कोषमें “उत्तराधिकारी” है। इसीलिये बन्धुदायादका अर्थ “कुटुम्बी' होनेसे उत्तराधिकारी” किया है। इसके विपरीत, अबन्धुदायादका अर्थ अबन्धु यानी कुट॒म्बी न होनेपर उत्तराधिकारी किया है। २. 'पौनर्भव”का अर्थ पद्मचन्द्रकोषके अनुसार दूसरी बार ब्याही हुई स्त्रीसे उत्पन्न पुत्र लिया गया है। 3. कानीन--यह अर्थ नीलकण्ठजीने अपनी टीकामें किया है। विशर्त्याधिकशततमो< ध्याय: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन वैशम्पायन उवाच एवमुक्ता महाराज कुन्ती पाण्डुमभाषत । कुरूणामृषभं वीरं तदा भूमिपतिं पतिम्,वैशम्पायनजी कहते हैं--महाराज जनमेजय! इस प्रकार कहे जानेपर कुन्ती अपने पति कुरुश्रेष्ठ वीरवर राजा पाण्डुसे इस प्रकार बोली--
vaiśampāyana uvāca | evam uktā mahārāja kuntī pāṇḍum abhāṣata | kurūṇām ṛṣabhaṃ vīraṃ tadā bhūmipatiṃ patim |
至此,《摩诃婆罗多》阿底篇(Ādi Parva)之中、诞生篇(Sambhava Parva)所载“般度与普丽塔(昆蒂)对话”第一百一十九章告终。毗湿摩耶那说道:大王阇那美阇耶啊,当她被如此劝说之后,昆蒂便对般度——她的夫君、英勇的地上之主、俱卢族中的雄牛——这样说道:
वैशम्पायन उवाच