कृपकृपी-जननम्
The Birth of Kṛpa and Kṛpī; Kṛpa’s Attainment of Astras
अपत्यमनघं राजन् वयं दिव्येन चक्षुषा । दैवोद्दिष्टं नरव्यात्र कर्मणेहोपपादय,ऋषि बोले--धर्मात्मा नरेश! तुम्हें पापरहित देवोपम शुभ संतान होनेका योग है, यह हम दिव्यदृष्टिसे जानते हैं। नरव्याप्र! भाग्यने जिसे दे रखा है, उस फलको प्रयत्नद्वारा प्राप्त कीजिये
诸仙人说道:“噢,国王,我们以天眼见你将得无垢之子嗣,远离罪过。噢,勇毅之人,当以作为与努力,使此世命运所指之事得以成就。”
वैशम्पायन उवाच