धृतराष्ट्रपुत्रनामावलिः (Roster of Dhṛtarāṣṭra’s Children) / Names of the Kauravas in Order
अणीमाण्डव्य इति च ततो लोकेषु गीयते । स गत्वा सदन विप्रो धर्मस्य परमात्मवित्,अणी कहते हैं शूलके अग्रभागको, उससे युक्त होनेके कारण वे मुनि तभीसे सभी लोकोंमें “अणी-माण्डव्य” कहलाने लगे। एक समय परमात्मतत्त्वके ज्ञाता विप्रवर माण्डव्यने धर्मराजके भवनमें जाकर उन्हें दिव्य आसनपर बैठे देखा। उस समय उन शक्तिशाली महर्षिने उन्हें उलाहना देते हुए पूछा--“मैंने अनजानमें कौन-सा ऐसा पाप किया था, जिसके फलका भोग मुझे इस रूपमें प्राप्त हुआ? मुझे शीघ्र इसका रहस्य बताओ। फिर मेरी तपस्याका बल देखो”
aṇīmāṇḍavya iti ca tato lokeṣu gīyate | sa gatvā sadanaṁ vipro dharmasya paramātmavit |
因此,自那时起,他在诸世界中被称颂为“阿尼·曼陀毗耶”(Aṇī-Māṇḍavya)。随后,这位通达至上真我之婆罗门曼陀毗耶前往法之居所,看见法王端坐于神圣宝座之上。凭借苦行之力,大圣者责难并问道:“我在不知不觉中犯了何罪,竟要以此形受苦?速速告我其中隐秘——然后且看我苦行之威!”
वैशम्पायन उवाच