अध्याय १५२: लोभः पापस्य मूलम् — Greed as the Root of Wrongdoing
निर्विद्यमान: सुभृशं भूयो वक्ष्यामि शाश्वतम् | भूयश्चैवाभिरक्षन्तु निर्धनान् निर्जना इव,“ब्राह्मणोंके शाप दे देनेपर हमारे कुलका कुछ भी शेष नहीं रह जायगा। हम अपने पापके कारण न तो समाजमें प्रशंसा पा रहे हैं न सजातीय बन्धुओंके साथ एकमत ही हो रहे हैं; अतः अत्यन्त खेद और विरक्तिको प्राप्त होकर हम पुनः वेदोंका निश्चयात्मक ज्ञान रखनेवाले आप-चजैसे ब्राह्मणोंसे सदा यही कहेंगे कि जैसे निर्जन स्थानमें रहनेवाले योगीजन पापी पुरुषोंकी रक्षा करते हैं, उसी प्रकार आपलतो अपनी दयासे ही हम-जैसे दुखी मनुष्योंकी रक्षा करें
bhīṣma uvāca | nirvidyamānaḥ subhṛśaṃ bhūyo vakṣyāmi śāśvatam | bhūyaś caivābhirakṣantu nirdhanān nirjanā iva ||
Bhīṣma nói: “Trong nỗi chán chường sâu thẳm, ta sẽ lại nói điều vĩnh cửu ấy. Và một lần nữa, nguyện các bậc ấy che chở kẻ nghèo khổ—như những ẩn sĩ nơi hoang vắng vẫn che chở cả kẻ tội lỗi.”
भीष्म उवाच