प्रयास्यन्त्यन्तरिक्षं हि शरवृन्दैर्दिगन्तरे । तत्र तिष्ठति संनद्धः स्वयं राजा सुयोधन:,“विशोक! जहाँ रथके पहियोंसे ऊपर उड़ी हुई धूल बाणसमूहोंके साथ अन्तरिक्ष और दिगन्तमें फैल रही है, वहीं स्वयं राजा दुर्योधन कवच आदिसे सुसज्जित होकर युद्धके लिये खड़ा है
“Quả thật, những bầy tên lao vút qua không trung về mọi phía; ngay tại đó, vua Suyodhana (Duryodhana) tự mình đứng, đã giáp trụ chỉnh tề.”
संजय उवाच